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जानिए कबीर जी के सतगुरु कौन थे ?

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janiye: कबीर जी के सतगुरु कौन थे दोस्तो आजकल कुछ धर्म के व्यापारी 'प्रचार' कर रहे हैं और अपनी पुस्तकों में लिख रहे हैं कि कबीर दास जी परमात्मा है और "गुरु नानक देव" जी को "सचखंड" लेकर गै यह बात बिल्कुल झूठ है। सच जानना है तो आप "प्राण संगली" जो गुरु नानक देव जी के सामने लिखी गई जो "गुरु ग्रंथ साहब" से भी पहले की है। तब लग कबीर दास के बारे एक भी पुस्तक नहीं लिखी गई "कबीर बीजक" भी सन १९०० के आसपास लिखा गया। 'प्राणसंगली' में कबीर दास और नानक जी गोष्ठी हुई जो प्राणसंगली में "गोष्ठी कबीर नाल होई" नाम से अध्याय है जिसका कुछ अंश जिसमें 'कबीर दास ने नानक देव जी को सतगुरु कहा' निम्नलिखित है  * प्रायण सगली १००" बहुत भाँति तप सिमरन कीना। तऊ न एहु मनु चंचल भीना ॥ हार परे सतिगुर के दुआरे। गुर नाम दान दे लीए उबारे ॥ १०॥ समझ परी तत्र भयो उदासी । तत्र काटी जम काल की फासी॥ जात कमीन जुलहा अपराधी । गुरु किरपा ते भगति समाधी ॥ सत्तिपुरुप सतिगुरु ते पाया। तब सतनाम लै रिदै बसाया ॥ मुक्त भये सतिगुर के शब्दी, ...

क्या अगस्त संहिता में 'कबीर' के बारे में लिखा है ?

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क्या अगस्त संहिता में 'कबीर' के बारे में लिखा है ? यह प्रश्न बहुत लोग पूछते हैं क्योंकि कुछ कबीर पंथी जो रामपाल कैदी के शिष्य हैं वो कुप्रचार करते हैं कि 'अगस्त संहिता' में 'कबीर' लिखा है जबकि सच यह है कि यह झूठ है क्योंकि सभी पुरातनकाल के ग्रंथों में 'कवि' लिखा है पर कबीर नहीं । कबीर एक अरबी भाषा का शब्द है और पुरातनकाल के ग्रंथ संस्कृत भाषा में हैं  अगस्त संहिता copy 👇 अगस्त संहिता की इस उपरोक्त श्लोक ४० का हवाला देते हुए कबीर पंथी प्रमाण देते हैं कि देखो संहिता में 'कबीर' लिखा है जबकि यह संस्कृत भाषा में 'कविरस्तु' लिखा है इस श्लोक ४० का मतलब क्या है और भावार्थ क्या है देखिए 👇 शब्द अर्थ  प्रह्लादोऽपि – प्रह्लाद जैसा (अत्यंत भक्त/उत्तम स्वभाव वाला) कविरस्तु – कवि/ज्ञानी/बुद्धिमान हो कुजे – कुज = मंगल ग्रह सिंहे च – सिंह राशि में शोभने – शुभ स्थिति में जातः – जन्म लेने वाला वेदान्त-सन्निष्ठः – वेदान्त में दृढ़ निष्ठा रखने वाला क्षेत्र-वास-रतः – भूमि/क्षेत्र (खेत, ग्राम, आश्रम या           साधना-स्थान) में रहने वाला सदा – हम...

guru shabd ka arth। गुरु शब्द का क्या अर्थ है?

आज हम बताएं गे कि गुरु शब्द का अर्थ क्या है और इसका मतलब क्या है। सबसे पहले जाने की गुरु का मतलब क्या है जो आप जानते ही हैं कि "गुरु" का मतलब उस्ताद या अध्यापक होता है। जो हमें गुण शिखाता है जिसे हम गुर कहते हैं अर्थात ज्ञान। गुरु का अर्थ है ज्ञान देने वाला और जो ज्ञान गुरु देता है वह गुर कहलाता है। गुरु शब्द अरबी के दो शब्दों से बना है गु+रु  गु का मतलब है अंधेेर गुफा या अंधेरा और रू का मतलब है रोशनी अर्थात आत्मा। जिसका मतलब है वह आदमीी जो अज्ञान रुपी अंधेरे को भगाकर ज्ञानरुप रोशनी को भर देता है वह गुरु है। और एक शब्द और है गुरू जिसका अध्यात्म मेंं प्रमात्मा  लिए प्रयोग किया जाता है। इसका उल्लेख गुरुग्रंथ जी में मिलता है। गुरुग्रंथ जी में ये तीनों शब्द देखने को मिलते हैं जिनका मतलब अलग अलग है पर अनुवादको ने तीनो को एक ही अर्थ में लिया है जो गलत है। गुरु का मतलब उस्ताद है गुर का मतलब ज्ञान है गुरू का मतलब है प्रकाशवान ब्रह्मांड का सृष्टि कर्ता जिसको गुरु नानक जी ने वाहगुरू कहा।           

खालक आदम सृजया आलम बडा कबीर का सही मतलब जानिए|

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खालक आदम सृजया आलम वडा कबीर,काईम दाईम कुदरती सिर पीरा दे पीर,सजदे करे खुदाई नू आलम वडा कबीर | खालक=प्रमात्मा आदम=आदमी सृजया =बनाया आलम=जहान वडा= श्रेष्ठ कबीर=बड़ा या महान 👆 सब शब्द अरबी भाषा के हैं "वडा"पंजाबी भाषा का है जिसका मतलब है हिंदी में श्रेष्ठ    (खालक आदम सृजया) प्रमात्मा ने आदमी को बनाया (आलम वडा कबीर) जो जहान मे बड़ा श्रेष्ठ है     काईम=कायम दाईम= हमेशा या सदा से कुदरती = प्रमात्मा की मेहर सिर= सिर पीरा = टिकना पीर= बजुरग      (काईम दाईम कुदरती) जो हमेसा प्रमात्मा की मेहर से (सिर पीरा दे पीर) बजुरग या संत लोग ही समझते हैं       सजदे= प्रणाम खुदाई= प्रमात्मा का वरदान      (सजदे करे खुदाई नू) जो प्रमात्मा के वरदान को प्रणाम करते हैं (आलम वडा कबीर) जो जहान बड़ा या बहुत श्रेष्ठ है         भावर्थ = प्रमात्मा ने आदमी को बनाया जो जहान मे बड़ा (बहुत) श्रेष्ठ है जो पुरातन से ही प्रमात्मा की मेहर से पीरों या बूजुरग ही समझते हैं और प्रमात्मा के दूारा आदमी को बनाने के वरदान को प्र...

Guru nanak in HARIDWAR | गुरु नानक देव जी हरिद्वार में क्या ज्ञान दिया ?

गुरुनानक देव जी की हरिद्वार यात्रा | गुरुनानक देव जी अपनी पूर्व की यात्रा करते हुए सबसे पहले हरिद्वार उत्तर प्रदेश मे पहुंचे जो आजकल उत्तर प्रदेश से अलग हुए राज्य उत्तराखंड मे है । जब वहा पहुंचे तो नानकदेव जी ने देखा कि यहां पर ब्रहामणो ने कई कर्मकांड चला रखे हैं ऐसे ऐसे कर्मकांड जिनको बुद्धिमान अनपढ मनुष्य भी सविकार नही करेगा, वह भी तर्क कर ही देगा । जब नानक देव जी सुबह सुबह स्नान करने के लिए गंगा घाट पर पहुंचे तो गुरुनानक देव जी ने देखा कि बहुत से ब्रहामण गंगा में खड़े होकर जल को सूर्य की ओर फैंक रहे थे तो नानकदेव जी ने उनसे पूछा ब्रहामण जनो यह क्या कर रहे हो ? । ब्रहामण ने उत्तर दिया - हम सूर्य को पानी दे रहे हैं जिससे वह दिनभर वह ठंडा रहेगा । यह सुनकर नानक देव जी पश्चिम दिशा की ओर जल फैंकने लगे यह देखकर ब्रहामण गुरुनानक देव जी से बोला- भाई तुम जल पश्चिम की ओर क्यो फैंक रहे हो ? नानक देव जी ने उत्तर दिया कि मेरी फसल पकिस्तान में सूख रही है मैं उसे सींच रहा हूं । यह सुनकर ब्रहामण बोला भाई तुम्हारी फसल पाकिस्तान में है इतनी दूर तुम्हारा फैंका जल कैसे जा सकता है ? तो गुरुनानक देव जी...

baba jinda and guru nanak dev ji

बाबा_जिंदा और गुरुनानकदेव जी _ बाबा जिंदा कौन? ये सब जानने के लिए इस पोस्ट को ध्यान से पडें | ये पोस्ट बाले वाली साखी मे से है साखी मीना परबत की |     साखी सुरु _ जब जोगी झंगरनाथ जी नानक जी के साथ गोष्ठी मे हार कर चला गया |तो मरदाना ने कहा जी तुम तो निरंकार है तेरे सामने कोई नही टिकता सब हार कर चले जाते हैं | तो गुरुनानक जी ने वचन कहा ~मरदाना, हमारा इतना बड़ा गुरु है जो निरंकार के बिना मेरी नजर मे कोई नही है | और मरदाना यहां कबीर भगत इत्यादि कई महात्मा हुए हैं पर किसी को मानष देही मे निरंकार का दर्शन नही हुआ | तो फिर मरदाने ने कहा ~तुम मे और निरंकार में कोई फरक नही | तो नानक जी ने कहा ~ मरदाने, निरंकार को सब एक जैसे ही हैं | तो मरदाने ने कहा ~ गुरु जी अब आगे चलो | तो फिर गुरु जी मीना परबत गए | (* यहां पर नानक जी ने साफ कहा है कि कबीर भगत और कई महात्मा जो हुए हैं किसी को प्रमेश्वर के जिंदे जी दर्शन नही हुआ)                        श्री गुरु नानक जी अंतरध्यान हुऐ तो समेत मरदाना मीना परबत पर जा खड़े हुऐ | तो मरदाना ने...

parmatma ka kaisa hai ?

आओ विचार करें प्रमात्मा कैसा होगा। प्रमात्मा आदमी जैसा नही।  Ish message ko sabi daason mein shere kro. Logon ko pakhand se bchao.  👉आज हम विचार करेंगे कि वह प्रमात्मा जिसने इस ब्रह्मांड की रचना की। जिसकी रचना के छोटे से धरती नामक जगह पर हम रहते हैं। वो कैसा होगा? क्या वो धरती पर या किसी मानव काल्पनिक क्षेत्र में रहता है? स्वाल तो और भी बहुत हैं। पर हम इन दो प्रशनो पर ही विचार करते हैं। सायद आप लोग भी देख रहे हैं कि आजकल गुरु और संत बहुत से लोगों को प्रमात्मा के नाम पर उनका माईंडवास करके सम्पत्ति अर्जित कर रहे हैं। हमे बस इन लोगों के चंगुल से निकलना और दूसरों को निकालने का प्रयास करना है। प्रमात्मा :- परम+आत्मा = मतलब वह आत्मा जो हम अर्थात हमारी आत्मा से परम है जिससे हम आत्माएं पैदा हुई यह ब्रह्मांड पैदा हुआ वो प्रमात्मा है करतार है अल्लाह है गौड है। कई ग्रंथों में लिखा है कि प्रमात्मा ने छ दिन में सृष्टि रचि और सातवें दिन तख्त पर जा बैठा । यह बात तो इस तरह लिख दी गई है जैसे वह ग्रंथकार प्रमात्मा को सृष्टि रचते देख रहा हो। इस बात में कितनी सचाई है आओ विचार करें? सबसे पहले तो ...